कला कलम क्रांति

मौन है कलम ये आज

है कला का ये दमन

उठ रही है लहरें

क्रांति का है सम्मान


कृतघ्न है कलम

खुद को बैठा स्रोत मान

कला की है कमन

कलम तो एक गौण मात्रा


ये आज लोग कहते कि

कलम कला को काट देगा

कला तो है ये सर्वव्यापी

कलम ये कैसे बांट देगा


लिखे कटु सच्चाई

ऐसे कुछ कलम हैं बावले से

होगा न प्यार इनसे

क्योंकि ये कलम हैं घोड़े साँवले से


मांगे न वार कोई

मांगते हैं ये सिर्फ म्यान

कत्ल के ये बनके दृष्टा

डरते ना देते एक बयान


आखरी कुछ छंद सिमटते

आंतरिक कुछ बातों से

वो चोट सबसे गहरी

जो लगती भेदियों के हाथों


आज ये कट्टार ताने

सामने खड़े हैं कट्टर

और स्थिति कला व कलम की

हो रही है सबसे बेहतर


कला को एक धरा में

और शांति बहने दो

जुड़ो इस धार में

लोगों को भ्रांतियों से बचाने दो




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